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​सोलह ब्रह्माकुमारी बहनों का भव्य समर्पण समारोह – Samarpan Samaroh

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नई दिल्ली, 4 दिसंबर- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था एवं मानव कल्याण आध्यात्मिक संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में हरिनगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में आज सोलह राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बहनों का एक भव्य समर्पण समारोह सम्पन्न हुआ।
अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक अध्यक्ष, प्रसिद्ध चिन्तक, कवि, लेखक एवं समाज सुधारक आचार्य लोकेश मुनि ने मुख्य अतिथि के रूप में इस समारोह को संबोधित किया और जैन धर्म की और से समर्पित ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा होने वाली सेवाओं की सफलता हेतु शुभ कामनाएं दी।उन्होंने कहा की मानव के मन में दायित्व की भावना विकसित करना समाज सेवा में सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा की जा रही विश्वव्यापी सेवाओं की सराहना की।उन्होंने कहा कि सच्ची आध्यात्मिक सेवा द्वारा अनेकता में एकात्म भाव स्थापित होता है जो कि ब्रह्माकुमारी बहनें समग्र मानवता को वसुधैव कुटुम्बकम व विश्व बंधुत्व की भावना से जोड़ने का काम कर रहे है।सरकार करोड़ों रुपया खर्च करके भी लोगों के नैतिक चरित्र का निर्माण करने में असमर्थ है। मूल्यनिष्ठ शिक्षा एवं राजयोग ध्यान द्वारा मानव में सुखदायी संस्कार व बेहतर जीवन निर्माण कर एक सुखमय संसार बनाने का कार्य जो ब्रह्माकुमारी बहनें बिना खर्च पिछले आठ दशकों से भारत तथा विदेश में कर रहीं हैं, वह वास्तव में सबके लिए अनुकरणीय है ।

माउंट आबू से पधारी ब्रह्माकुमारी संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी सन्तोष दीदी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था ने लाखों बेटी बचाओ व लाखों बेटी पढ़ाओ का बीड़ा उठाया है । उन्होंने कहा कि यह संस्था सही अर्थ में विश्व की बेटियों को शिक्षित और सशक्त करने की सेवा कर रही है।प्रख्यात पत्रकार डाo वेद प्रताप वैदिक ने अपने वक्तव्य में कहा कि नकारात्मकता से भरे वातावरण में शुभता व सकारात्मकता का माहौल पैदा करने वाली आध्यात्मिकता ही है। उन्होंने कहा कि मानव और समाज उत्थान के कार्य में समर्पित ब्रह्माकुमारी बहने अध्यात्मिक ज्ञान व योग विद्या की देवी हैं, जो अपनी निस्वार्थ सेवा से दुनिया में नयी आशा एवं सच्ची सुख शांति की किरणे संचार कर रही हैं, और समाज को सफल महिला नेतृत्व प्रदान कर रही हैं।उन्होंने समर्पित कन्याओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारी बहने किसी भय, प्रलोभन या बहकावे में आकर नहीँ, बल्कि स्वयं की इच्छा और मात पिता की स्वीकृति से, अपना जीवन समर्पित किये है। आज के समय मे नौजवान बालिकाएं ऐसी सात्विक व सदाचारी जीवन का व्रत लिए है जो वास्तव में सब के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कार्यक्रम की मुक्य आयोजिका राजयोगिनी बी के शुक्ला दीदी ने कहा कि सादा जीवन और उंच विचार के साथ साथ शाकाहारी खानपान ही हमारे जीवन को स्वस्थ, सुखी, शक्तिशाली व सुरक्षित रखता है, जिसका जीता जागता उदाहरण त्यागी, तपस्वी व साध्वी ब्रह्माकुमारी बहनों की पवित्र जीवन है।

भारतीय नौ सेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल एस एन घोरमडे ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि त्याग व तपस्या के बिना समाज की सेवा संभव नहीं है । उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक सशक्तिकरण द्वारा समाज की सेवा के लिए ब्रह्माकुमारी बहनों के त्याग सराहनीय है। उन्होंने कहा कि यह संस्था  नारी सशक्तिकरण की यह अद्भुत मिसाल है।

ब्रह्माकुमारी संस्था के कार्यकारी सचिव राजयोगी बी के मृत्युंजय ने संस्था द्वारा दी जा रही अध्यात्मिक  प्रज्ञा, मूल्यनिष्ठ शिक्षा व राजयोग मैडिटेशन को स्वर्णिम भारत निर्माण का आधार स्तम्भ बताया। उन्होंने ब्रह्माकुमारी बहनों को शिव शक्ति स्वरूपा ज्ञान की गंगा बताया और कहा कि इनके द्वारा ही  बेहतर विश्व रचना की आध्यात्मिक क्रांति लायी जा रही है।

इस अवसर पर मुख्य रूप में ब्रह्माकुमारी संस्था की ओम शांति रिट्रीट सेंटर की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी;  अहमदाबाद से पधारी राजयोगिनी शारदा दीदी; न्यायिक प्रभाग की अध्यक्षा, राजयोगिनी बी के पुष्पा दीदी आदि ने अपनी शुभ कामनाएं अर्पित की।

सोलह समर्पित ब्रह्माकुमारी सेविकाओं ने अपने माता पिता के साथ जन कल्याण की सेवाओं में अपने जीवन समर्पित करने की नियम व मर्यादाओं की प्रतिज्ञायें की ।कुमारी पिंकी, लक्षिता, ग्रेस, मीनाक्षी तथा अन्य युवा कलाकारों ने दिव्य नृत्य, गीत, नृत्य नाटिका एवं अन्य रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

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डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में संपन्न हुआ राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन

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“विश्व एकता और विश्वास हेतु नई शिक्षा” विषय पर राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन सम्पन्न

* यहां की आध्यात्मिक शिक्षा श्रेष्ठ संस्कारों का निर्माण करती है – मनजिंदर सिंह सिरसा
* भारत को विश्वगुरु बनाने हेतु मूल्य-आधारित शिक्षा आवश्यक है – बी.के. शिवानी
* आज 80% बीमारियां मनोदैहिक हैं, सकारात्मक संकल्पों की शक्ति हमें शीघ्र हील करती है – डॉ. मोहित गुप्ता

नई दिल्ली, हरिनगर। ब्रह्माकुमारी संस्था के शिक्षा प्रभाग द्वारा “विश्व एकता और विश्वास हेतु नई शिक्षा” विषय पर डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित शिक्षकों का राष्ट्रीय महासम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन में दिल्ली-एनसीआर तथा देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे लगभग 500 शिक्षाविदों ने भाग लिया।

दो सत्रों में संचालित इस कॉन्फ्रेंस को देश के शीर्ष शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं आध्यात्मिक नेताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली में विज्ञान व तकनीक के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, नैतिक ज्ञान और आध्यात्मिक प्रज्ञा के समावेश पर बल दिया।

इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि, दिल्ली सरकार के उद्योग मंत्री तथा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि “ब्रह्माकुमारीज़ विश्व की सबसे बड़ी संस्था है जो नारी शक्ति का परिचायक है। यहां की आध्यात्मिक शिक्षा श्रेष्ठ संस्कारों का निर्माण करती है।” उन्होंने राजयोग विचार प्रयोगशाला प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसे अद्भुत बताया।

सम्मेलन का मुख्य आकर्षण प्रेरक वक्ता ब्रह्माकुमारी शिवानी रही। उन्होंने सहज राजयोग शिक्षा को मानव जीवन, चरित्र और समाज उत्थान का आधार बताते हुए कहा – “सृष्टि का आरंभ संकल्पों से होता है और मानव संसार संस्कारों से निर्मित होता है। बाहरी संसाधनों के उपयोग से पहले व्यक्ति का आंतरिक सशक्तिकरण आवश्यक है। आध्यात्मिक ज्ञान और सहज राजयोग ध्यान के माध्यम से हम जीवन में सुखद, सफल और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं तथा प्रकृति के दोहन को रोक सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास, आध्यात्मिकता और मूल्य-आधारित शिक्षा के आधार पर ही भारत पुनः विश्वगुरु बन सकता है और धरती पर विश्व शांति, एकता एवं भाईचारे की स्थापना संभव है।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा संस्थान (AICTE) के अध्यक्ष प्रो. टी.जी. सीताराम ने छात्रों में बढ़ते अवसाद पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा – “आज हर तीसरा विद्यार्थी अवसादग्रस्त है। केवल तकनीकी शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, इसके साथ आंतरिक प्रज्ञा और आत्मबल को बढ़ाने वाली आध्यात्मिक शिक्षा भी आवश्यक है। ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा संचालित ‘स्वयं पोर्टल’, राजयोग लैब और अन्य आंतरिक सशक्तिकरण प्रणालियाँ इस दिशा में सराहनीय प्रयास हैं।”

शिक्षा प्रभाग के अध्यक्ष, राजयोगी बी.के. मृत्युंजय ने कहा – “नई शिक्षा, नये संस्कार और नई सृजन प्रक्रिया का कार्य स्वयं परमात्मा द्वारा प्रजापिता ब्रह्मा के माध्यम से कराया जा रहा है, और इसी से भारत विश्वगुरु बनेगा।”

इस अवसर पर मुख्य आयोजिका राजयोगिनी बी.के. डॉ. शुक्ला ने आंतरिक सशक्तिकरण हेतु राजयोग साधना को आधार बताया। गुजरात से पधारी युवा प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी बी.के. चन्द्रिका ने सम्मेलन के मुख्य विषय पर प्रेरक विचार रखे।

कार्यक्रम के समापन पर राजयोगिनी बी.के. आशा ने राजयोग ध्यान द्वारा सामूहिक डिवाइन हीलिंग का अभ्यास कराया, जिससे उपस्थित जनसमूह ने आंतरिक शांति, शक्ति और सुखद स्थिति का गहन अनुभव किया।

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Janmasthami Celebration at Brahmakumaris Hari Nagar Delhi.

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